मंगलवार, 26 अप्रैल 2022

मृत्यु

भाई लगा रहा लकड़ियाँ,बेटा सजा रहा शरीर
भीड़ लगी भारी श्मशान में ,हर कोई कोस रहा तकदीर |
सज गई चिता नदी किनारे
 रखा गया उस पर शरीर |
धीरे-धीरे आग लगी चिता मे,
धीरे-धीरे जलता शरीर|
क्या लाया क्या ले गया,
सब तो यही पड़ा रह गया|
 जब कुछ नहीं जाना संग में,
 तो फिर क्यों मार रहा जमीर ||

रविवार, 24 अप्रैल 2022

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 हरिद्वार के कनखल का उल्लेख मिलता है-  मेघदूत  मैं
 हरिद्वार को शिव की राजधानी कहा -  टॉम कारयट 
 हरिद्वार पर आधारित पुस्तक न्यूज़ इंडिया के लेखक -  जॉब फ्रांसिस वाइट
 हल्द्वानी नगर पालिका की स्थापना -1897
 राज्य का पहला टयूलिप गार्डन -  पिथौरागढ़
 सात पहाड़ियों से घिरा हुआ प्रसिद्ध स्थल -  रूपकुंड
   रतमऊ एवं सोलानी नदी सहायक नदी है -  गंगा नदी 
 कुमाऊं की प्रथम कृत्रिम झील मानी जाती है -  बैजनाथ  झील
 राज्य की  सबसे बड़ी नदी -  काली नदी(225km)
 शैलेश मटियानी पुस्तक संग्रहालय -  रामगढ़( नैनीताल)
 राज्य में प्रथम जीव गणना ( वन) - 1986
 रानीखेत में गोल्फ ग्राउंड का निर्माण - 192

  आपके द्वारा पसंद किए जाने पर  आगे भी हम यह   सीरीज  जारी रखेंगे

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शनिवार, 23 अप्रैल 2022

जवाब मांगेगा भविष्य

 आगे आने वाली पीढ़ीया हमे शायद ही  माफ करें लेकिन जब ऊपर वाले के यहां हिसाब देने का वक्त आएगा, तो सबसे पहले वह हम लोगों को( जो सैकड़ों कारण बता देते है राजनीति में भाग न लेने की) बुलाकर सवाल करेगा| क्यों? क्यों तुमने आगे बढ़कर विरोध नहीं किया, इस राजनीति के नाम पर फैले आतंक का, विनाश का ||
 कैसे खामोशी से आखिर तुम  यह सब  होता देखते रहे, क्यों तुम्हारा जमीर  नहीं जागा?
 पतन की गर्त में धसता रहा देश और तुम देखते रहे,   नपुंसक की तरहा ||
" समय आ चुका है की  नव युवा आगे बढ़े और  भाग  ले लोकतांत्रिक मूल्यों में चलने वाली राजनीति में"

 धर्म जाति क्षेत्र में देश को न बटने दिया जाए, आज क्षेत्र जाति धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रीय विकास की भावना रखने वाले युवाओं की जरूरत है, जरूरत है 21वीं सदी के भगत सिंह  की ||
Satish Shiv Singh Khadka

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मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

स्वामी विवेकानन्द के शब्द

स्वामी विवेकानन्द जी ज्ञान के भड़ार हैं,छुआ छुत के बडे
विरोधी थे।
कक्षा ८ कि किताब से लिये ये दो अंश शायद आपको कुछ दे पाये।

सतीष खड़का   @satishkhadka10
9412403290

बुधवार, 13 अप्रैल 2022

old memory

team review (zonal office),
market visit ..
party 
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bhikiyasain almora
almora
satish khadka
8923927777  @satishkhadka1😘

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मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

सामान्य विज्ञान

प्रश्न–चन्द्रमापरवायुमण्डिनहोनेकाक्याकारणहे?उत्तर–वहााँसभीगसों
कावगणमाध्यमूिवग(Rootmeansquarevelocity)उनके पिायन
वग(EscapeVelocity)सेअधधकहै।
प्रश्न–ककसएककोलशकीयशैवाि(UnicellularAlgae)काउपयोगअन्तटरक्षमेंखाद्यकीसमुधचतपूनतिकेलिएककयाजाताहै?उत्तर– क्िोरेिा(Chlorela)
प्रश्न–प्राकृनतकरबरककसकाबहुिक(Polymer)है?उत्तर– आइसोप्रीन(Isoprene)का
प्रश्न–द्रव्यकीचौथीअवस्थाक्याकहिातीहै?उत्तर–प्िाज्मा(Plasma)
प्रश्न–प्रत्यावतीधाराकीमापककसयंिसेकीजातीहे?उत्तर–तप्ततार अमीटर(hotWireAmmeter)से
प्रश्न–टेट्राडुथाइििैड(TEL)पेट्रोिमेंक्योंधमिायाजाताहे?उत्तर– एन्टीनॉककिंगरेटटिंग(अपस्फोटनकीदर)कोबढानेकेलिए
प्रश्न–हीरेकीचमकहोतीहै?उत्तर–पूणणआन्तटरकपरावतनकेकारण
प्रश्न–आपेलक्षकआद्रणता(Relativehumidity)नापीजातीहै?उत्तर– हाइग्रोमीटर(Hygrometer)से
प्रश्न–रेटटनापरबननेवािाप्रनतनबम्बहोताहै?उत्तर–वास्तनवक,उल्टातथा वसतुसेछोटा
प्रश्न–पोलियाकाटीकासवणप्रथमककसने तैयारककयाथा?उत्तर–जोन्स साल्कने
प्रश्न–गोबरगैसकामुख्यसंघटकक्याहै?उत्तर–मीथने

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रविवार, 10 अप्रैल 2022

1937 यंग इंडिया मैं गांधीजी ने लिखा



मेरे लिए राजनीतिक प्राधिकार एक अंत नहीं है ,परंतु एक साधन है ,जो लोगों को उनके जीवन के प्रत्येक स्तर पर अपनी स्थिति सुधारने में समर्थ बनाता है |राजनीतिक प्राधिकार का अर्थ है राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के द्वारा राष्ट्रीय जीवन को व्यवस्थित करने की क्षमता ,अगर राष्ट्रीय जीवन इतना उत्तम हो जाता है कि स्वचालित बन जाये,तब कोई प्रतिनिधित्व की आवश्यकता नहीं रह जाती है |ऐसे राज्य में प्रत्येक स्वयं अपना शासक होता है |वह अपने आप को ऐसे शासित  करता है कि अपने पड़ोसी के लिए कोई बाधा उत्पन्न नहीं करता "

शनिवार, 9 अप्रैल 2022

क्या राज्य वास्तविक मुद्दे पर चर्चा करेगा.अन्य किसी विकल्प पर एक मत होगा.

9 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए  11वें पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को 22 वां वर्ष पूरा होने को आया,पांचवा चुनावी दौर बीता और राज्य को 11वां मुख्यमंत्री मिला| यानी देखे तो एक मुख्यमंत्री ने 2 वर्ष का कार्यकाल भी नहीं बिताया,राजनीति प्रशासन पर प्रशासन राजनीति पर हावी रहा,और इस खेल में पलायन तेजी से बाहें पसारता रहा|राज्य जिन उमीदो और सपनों की नींव पर खड़ा हुआ था वह धाराशाही होता चला गया,
ऐसे में यक्ष प्रश्न यह उठता है कि आखिरकार राज्य जिन परिस्थितियों में है वह क्यों है ?
इसका जवाब छुपा है इस सवाल पर कि आखिरकार यह राज्य उत्तराखंड अस्तित्व में आया ही क्यों ?
कांग्रेस के श्रीनगर अधिवेशन 1939 में पहली बार उत्तराखंड के अलग प्रांत की मांग ने अपना मुंह उठाया और समय के साथ-साथ इस ने आंदोलन का रूप ले लिया ,1979 में उत्तराखंड क्रांति दल का गठन हुआ और इसने राज्य मांग की क्रांति को काफी आगे तक पहुंचाया ,1994 के गोली कांड और उग्र होते आंदोलन को 2 नवंबर 2000 को अपना मुकाम मिला, विकास की रफ्तार धीमी होना और पहाड़ी राज्य की परेशानियों को मैदान में बैठे शासन और प्रशासन की समझ से बाहर होना ,पहाड़ की शासन व्यवस्था पहाड़ के लोगों के हाथ हो यही मांग आंदोलन से   क्रांति बनी और राज्य बनने के साथ ही सत्ता सुख लोलुपता की बलिवेदी में शहीद हो गई|
शुरुआती उठापटक के साथ ही यूकेडी धराशाई हो गई और राज्य दिल्ली में बैठे दो राष्ट्रीय पार्टियों के बीच फुटबॉल सा बन गया|पहाड़ की तस्वीर ना बदल पाई हां कई नेताओं और दलालों के साथ चतुर नौकरशाहों की जरूर चांदी हो गई ,जिस राज्य का पहाड़ी समझ के साथ चलाने की इच्छा पर गठन हुआ वह अपनी राजधानी तक पहाड़ में ना बना सका |
क्या राज्य वास्तव में पहाड़ के लोगों द्वारा पहाड़ में चलाया जा रहा है ?
इसका उत्तर देना मैं जरूरी नहीं समझता क्योंकि सबको पता है हकीकत क्या है|
जब तक राज्य जमीनी हकीकत को समझते हुए स्थानीय रूप से संगठित नहीं होता तब तक हर बहस हर बात सिर्फ  बेमानी होगा ,
राष्ट्रीय पार्टी से हटकर जब तक राज्य अपनी पहचान स्वयं खडी नहीं करता राज्य की विषम परिस्थिति पर बात करना सिर्फ एक मजाकिया व्यंग होगा ,जो पिछले 22 साल से चल ही रहा है |
Satish Shiv Singh Khadka

राजनीति ओर जनता २

अपनी लाख मजबूरियों की वजह से हम आज भले ही सीधे तौर पर राजनीति से ना जुड़ पाए |किंतु एक स्वस्थ राजनीति एक साफ-सुथरी और सिस्टम से चलने वाली राजनीति के भागीदार बने,यह हमको सुनिश्चित करना होगा और यह भी कि युवाओं की भागीदारी राजनीति में बड़े |
"सिस्टम के बाहर खड़े हो गाली बकना आसान है मगर जरूरत है सिस्टम का हिस्सा बनने की"
आज राजनीति में आम जनता भागीदारी करें यह जरूरी है,लोकतांत्रिक राष्ट्र का नागरिक होने के नाते हमें लोकतंत्र कसमझपैदाकरनीहोगी और चलना होगा लोकतांत्रिक नियमों और मूल्यों पर

Satish khadka
khatima
8923927777



शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

राजनीति ओर आम जनता

राजनीति हम सब की जिन्दगी में एक अहम रोल अदा करती है,बिना भेदभाव के ये धर्म,जाति,क्षेञ,राष्ट ही नही 
विश्व मे अपने रोल को निभातीहे.
राजनीति को बुरा माना जाता हे,कोई भी किसी भी रूप में राजनीति से जुडना नही चाहता। मे मानता हु कि आज राजनीति का विभत्स रूप हमारी जिन्दगी को आतंकित किये हे।किन्तु राजनीति ये नही ये हमको समझना होगा।
आज राजनीति चंद लोगो के हाथ की कठपुतली बन गया हें,क्योकि समाज ने इससे किनारा कर लिया है।
सबसे बडा रोल जो इसमें युवाओ का होना चाहिये था,
वो इससे अलग थलग हो गया हें,आज जरूरत हे कि समाज का हर वर्ग का युवा उठकर आगे बढे ओर राजनीति का हिस्सा बने।
हम इससे जितना मुहँ चुरायेगे,ये उतनी ही विभत्स होती जायेगी....


कर्मशः