सबक
सबक ले चुके हो,अब समय निर्णय का आ चुका है॥
बातों और झूठे वादों से जिंदगी नहीं कटती,अब भी नही समझें तो,बहुत कुछ है जो संभाल सकते हो उसे भी खो दोगे।डर कर जीने की मज़बूरी से बाहर निकलो और बता दो इन झूठे, डर फैला कर राज करने कि तमन्ना करने वालों को,भारतीय ना ब्रिटिश भय से भयभीत हुए थे ना आज इन डरे हूंओ से डरेंगे ।देश संविधान की धारणा पर चलेगा न कि आमजन को डराकर।आज सीधा वार किया जा रहा जनता पर,डरा कर शासन करने की इच्छा रखी जा रही है ,मगर याद रखना डरा हुआ लोकतंत्र सिर्फ डर पैदा करता है ।डरी हुई नस्ल और डरा हुआ भविष्य आपको कोसेगा ।
आपके पूर्वज डरे नहीं थे तभी आजादी से जी पाए,वो संविधान की गरिमा थी की एक आम जन प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद पर पहुंचा।आज का युवा प्रश्न चिह्न पर जी रहा है ।
सोचो समझो मत डरो जवाब दो डर से लड़ो
