मृत्यु
भाई लगा रहा लकड़ियाँ,बेटा सजा रहा शरीर
भीड़ लगी भारी श्मशान में ,हर कोई कोस रहा तकदीर |
सज गई चिता नदी किनारे
रखा गया उस पर शरीर |
धीरे-धीरे आग लगी चिता मे,
धीरे-धीरे जलता शरीर|
क्या लाया क्या ले गया,
सब तो यही पड़ा रह गया|
जब कुछ नहीं जाना संग में,
तो फिर क्यों मार रहा जमीर ||

<< मुख्यपृष्ठ