गांधी का रामराज्य
महात्मा गांधी के "रामराज्य" की अवधारणा एक आदर्श समाज की परिकल्पना थी, जिसमें नैतिकता, सत्य, अहिंसा, समानता और न्याय की प्रधानता हो। यह कोई धार्मिक राज्य नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज था जिसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार मिले, कोई शोषण न हो, और सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें।
गांधी के रामराज्य की विशेषताएँ
1. सत्य और अहिंसा पर आधारित समाज ।
2. समानता और न्याय ।
3. स्वराज और स्वावलंबन ।
4. साधनों की पवित्रता ।
5. नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का पालन।
1937 यंग इंडिया मैं गांधीजी ने लिखा
मेरे लिए राजनीतिक प्राधिकार एक अंत नहीं है ,परंतु एक साधन है ,जो लोगों को उनके जीवन के प्रत्येक स्तर पर अपनी स्थिति सुधारने में समर्थ बनाता है |राजनीतिक प्राधिकार का अर्थ है राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के द्वारा राष्ट्रीय जीवन को व्यवस्थित करने की क्षमता ,अगर राष्ट्रीय जीवन इतना उत्तम हो जाता है कि स्वचालित बन जाये,तब कोई प्रतिनिधित्व की आवश्यकता नहीं रह जाती है |ऐसे राज्य में प्रत्येक स्वयं अपना शासक होता है |वह अपने आप को ऐसे शासित करता है कि अपने पड़ोसी के लिए कोई बाधा उत्पन्न नहीं करता "
गांधी का रामराज्य और आधुनिक समाज
गांधीजी का रामराज्य केवल धार्मिक या पौराणिक संदर्भ में नहीं था, बल्कि एक लोकतांत्रिक, समानतावादी और नैतिक रूप से आदर्श समाज की संकल्पना थी। आज के संदर्भ में इसे एक ऐसे समाज के रूप में देखा जा सकता है जहाँ शासन पारदर्शी हो, हर व्यक्ति को न्याय मिले, और सभी को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार प्राप्त हो।
Satish Shiv Singh Khadka
राजनीति शास्त्र का विद्यार्थी
9837017847
सभी कांग्रेस के मेरे मित्र,
पार्टी प्रवक्ता तो नहीं हूं ना ही कोइ पदाधिकारी हु। समाजवाद और गांधीवाद विचारधारा का लेखक हु। कुछ लिखने का प्रयास किया है,और एक कांग्रेसी होने के नाते आपको जरूर पढ़ना चाहिए
https://indianpoliticsnc2025sk.blogspot.com/
लेबल: गांधी, रामराज्य, gandhi, Mahatma Gandhi

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