गुरुवार, 30 जून 2022

सोने का हिरण

माता सीता ने सोने के हिरन का भर्म किया इससे कहीं ज्यादा दुखद यह था कि भगवान राम उसके पीछे गए उसे भेदने को। दोनों अपने समय के विद्वान थे किंतु 'विनाश काले विपरीत बुद्धि'
यह सत्य है कि इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती है कि आप यह सोचे यह भगवान की लीला थी,किंतु मैं यह कहूंगा यहां भगवान ने हमें समझाने की कोशिश की है कि अगर हम किसी लालच में फंसे तो कष्ट के भागी होंगे। अधर्म स्वार्थ और घृणा से भरा कोई आतताई आपको अपनी धूर्तता से झूठ का दिवास्वप्न दिखा रहा हो ,और दुखद यह है कि आप उसकी कूटनीति का शिकार हो जाओ,तो इसे सिर्फ आपकी मूर्खता ही माना जाएगा,जबकि बार-बार आप देख रहे हो कि मां सीता तो सिर्फ एक बार अपहरण की गई किंतु आपका तो सैकड़ों बार अपहरण किया जा रहा है। भर्म के जंगल में भटकने को रोक बाहर निकलो धूर्तता की मिठास का असली कड़वापन पहचानो। यू हर बार लालच में आकर अपना और अपनों का अपहरण मत होने दो। 
क्योंकि आप को समझना होगा सत्य यही है की सोने का  हिरण नहीं होता यह सिर्फ झूठ का भ्रम है।

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मंगलवार, 28 जून 2022

कुछ ना कुछ

"कुछ ना कुछ कर ही लेंगे" कल जब 17 वर्षीय मेरे भतीजे ने मुझे यह शब्द कहें।उसकी आंखों की तरफ देखते हुए मैं उसके दिल दिमाग की गहराई तक झांक चुका था,मुझे अहसास हुआ यह शब्द सिर्फ शब्द नहीं है,जो यह कह रहे हो की 'कर लेंगे कुछ ना कुछ' यह शब्द सूचक है हमारी हार की स्वीकृति का हमारे समझौते का,टूट चुके सपनों का और आज तक कि मेहनत के बिखर जाने का। यह शब्द जैसे कह रहा है की मम्मी पापा मानता हूं कि सपने टूट गए और कोई मोल ना रहा तुम्हारे समझौतों का, कैसे तुमने अपनी जरूरतों को मार कर मेरी शिक्षा कपड़ों और अच्छे जीवन स्तर को बनाने में इन उम्मीदों के साथ कि मैं एक बेहतर जीवन, सुरक्षित जीवन जीऊूंगा और अपने आने वाले बच्चों को स्वयं से बेहतर बनाऊंगा। पापा मैं जानता हूं कि आपने अपने जूतों को 1 साल और पहना कि मैं बेहतर जूते पहन सकूं मां ने पुरानी साड़ी से काम चलाया सिर्फ इसलिए कि मैं बेहतर कोचिंग की फीस जमा कर सकूं । पापा रोज चाय के पैसे बचाते हैं ताकि मैं दूध पी ताकतवर बनू। मम्मी पापा स्वयं कभी नहीं खाते मगर मुझे देसी घी बादाम खिलाते ताकि कमजोर ना पढ़ जाऊं पर आज ,आज मैं कमजोर पड़ गया,हार गया,,,
कुछ न कुछ कर ही लेंगे मानो यही कह रहे हो यह शब्द,
कोई भी मां बाप कभी नहीं चाहता कि उसका बच्चा कभी इस हालात में पहुंचे, की वह महसूस करें और सोचे की जीवन जीने के लिए वह कुछ ना कुछ कर ही लेगा। यह शब्द उसके त्याग और बलिदान को उसकी उम्मीदों को कुचलने जैसा हुआ। और कम से कम लोकतांत्रिक देश में यह होना तो गलत है, बिल्कुल गलत है।

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मंगलवार, 14 जून 2022

सवाल

वह जो वक्त सामने से आ रहा है ,

तेरे लिए कई सवाल लेकर आ रहा है ,

माना कि आतताई देश उजाड़ रहा था,

 डर का चारों तरफ आतंक मचा रहा था,

 धर्म के नाम पर आपस में लड़ा रहा था ,

मगर तू क्यों चुप बैठा रहा;

 चिंता में मेरी भविष्य की तू चुप रहा ,

देखता तो कैसे भविष्य मेरा अंधेरा हो रहा था:

 लोकतंत्र में तू जिया परतंत्र मेरे लिए छोड़ रहा था,

आप इसको youtub पर https://youtube.com/shorts/JNUZ6ntO1ao?feature=share  ANDhttps://youtube.com/channel/UCjSCRXuTrpJK7hr9r1asa8g

मंगलवार, 7 जून 2022

उत्तराखंड में तीसरे विकल्प पर मेरा नजरिया

उत्तराखंड में आज बदलाव की बात हर ओर सुनने को मिल रही है। हर कोई तीसरे विकल्प की बात कर रहा है।और यह आज इस राज्य के लिए जरूरी भी हो गया है।
 22 वर्षों का सबर करके हम उत्तराखंड वासी देख चुके हैं। अब और 22 साल नहीं। बदलाव की बाहर जरूरी है,जरूरत है शासन की बागडोर अब गरीब आम जनता अपने हाथ में ले और इसे राज्य  परिस्थिति की समझ के साथ चलाएं। सवाल ये उठता है कि कैसे?तो इसका जवाब है ग्राम पंचायत।
 सबसे पहले हमें ग्राम पंचायत स्तर पर काम करना होगा,और गांव के हर व्यक्ति को इसके लिए शिक्षित करना होगा ,आपसी सामंजस्य बातचीत के बाद बिना रुपए खर्च किए पंचायत का गठन करना होगा। वर्षों से चली आ रही।अध्धा पव्वा व्यवस्था को सब सबसे पहले निचले स्तर से निकालकर फेंकना होगा। बिना खर्च किए बना प्रधान विकास कार्य करके दिखाएगा।और तब जागेगी एक नई व्यवस्था के प्रति लोगों में विश्वास ओर उम्मीद।
 और तब जनता की ताकत उखाड़ फेंकेगी भ्रष्ट और निकम्मी सरकार को।

और तब निर्माण होगा जनता के द्वारा जनता के लिए सरकार का, एक आम गरीब नागरिक के द्वारा अपनी ओर अपनो की सरकार का, 
 राज्य में  युवाओं द्वारा चलाए जा रहे,कुछ बेहतर प्रयासों की में प्रशंसा करता हूं। पर यह समय है सभी का एकजुट होकर एक साथ एक ही दिशा में संगठित और संवैधानिक प्रयास करने  का।
 मैं उम्मीद करता हूं कि मैं अपनी बात आप तक बेहतर तरीके से  पहुंचा पाया हुंगा। 
                                        धन्यवाद जय हिंद

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