बुधवार, 25 जून 2025

आपात नजरिया एक विद्यार्थी का

 बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत. बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीति
 700 वर्षों के बाद  इतिहास एक बार फिर स्वयं को दोहराने जा रहा था। एक महिला शासिका के वर्चस्व को अस्विकारते हुये, उसे अपदस्थ करने का षड्यंत्र रचा जा रहा था।
 एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबसुरती यह होती है कि संसद में बैठे पक्ष और विपक्ष के नेता मिलकर देश हित में, लोकहित में, कार्य करते है।किसी भी मुद्दे पर मत् विभेद होना आम है, किन्तु मन विभेद नहीं रखा जाता है, क्यों अंततः दोनों ही पक्षों का लक्ष्य राष्ट हित ही होता है। किंतु 1966 से 1975 के बीच और उसके बाद भी विपक्ष सिर्फ और सिर्फ लोकतांत्रिक
व्यवस्था में संकट पैदा कर रहा था। विपक्ष लगातार चुनी हुई सरकार के लिए असंवैधानिक हालात पैदा कर रहा था।
वो भी उन हालात में जब प्राकृतिक और विदेशी ताकत लगातार देश के लिए समस्या बनीं हुई थीं।
लगातार संवैधानिक व्यवस्था को चैलेंज करते विपक्ष के लिए, आंतरिक आपात जरुरी था,
कुछ मुद्दे जिन पर चर्चा जरुरी हैं : -

20 दिन से अधिक समय तक रेल बंदी।
गुजरात से लेकर बिहार तक छात्र आंदोलन वो भी बेरोजगारी और मंहगाई के लिए।
PAC का हंगामा।
राजकीय कर्मचारी और पुलिस और फौज को सरकार के आदेश मानने से इंकार करने के लिए उकसाना।

और आप हैरान होगे 1947 से 2025 तक 26 बार सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, इसमें से 15 बार सिर्फ़ इन्दिरा गांधी जी के लिए लाया गया। ऐसी कौन सी विपक्ष को जल्दी थीं सरकार गिराने की या एक महिला की लीडरशिप बर्दाश्त नहीं हो रही थी।

आपात काल संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार लगाया गया। और जो मिली भगत चल रही थी उसको दबाया गया।
रही बात ये फैलाने की नसबंदी वाली, तो आबादी 3 गुना हो गई। और आप ही जरा बताओ आपके आस पास कितने ऐसे बुजुर्ग 70 साल के मिले जो कुंवारे नसबंदी के शिकार हुए। ये सिर्फ़ एक झूठ फैलाया गया। ये सच है कि उस समय नसबंदी कार्यक्रम चल रहा था जिसको कड़ाई से चलाया गया।

अपनी अधूरी किताब 
"आपात नजरिया एक विद्यार्थी का "  से लिए अंश 

सतीश शिव सिंह खड़का 

मंगलवार, 17 जून 2025

uttrakhand panchayat chunav 2025

उत्तराखंड में जल्द ही पंचायत चुनाव होने की घोषणा हो चुकी है। सभी भावी प्रत्याशियों को अग्रिम बधाई! हर गांव-क्षेत्र से कई प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं, जिनमें अनुभवी और नए चेहरे जितने को मैदान में उतरने को तैयार बैठे है।
मुझे पूरी उम्मीद है कि आप विजयी होंगे, फिर भी में आपके साथी के तौर पर आपके समक्ष कुछ बिंदु पर अपनी रणनीतिक राय रख रहा हूं . उम्मीद है आप इसे अपनी रणनीतिक में शामिल करेंगे।
आपका चुनावी अभियान सफल हो!

स्थानीय चुनाव में सबसे बेहतर बात ये होता है कि आपका प्रत्येक वोटर आपको जानता है।

आपके लिये सबसे बड़ा चैलेंज है वोटर से क्नेक्ट करना, यकीन मानिए, जब तक वोटर आप से कनेक्ट नहीं करता, वो आपसे कन्वेंश भी नहीं होगा। 
आप उसे ख़ुद से जोड़ सके इसके लिए मे 6 बिंदुओं पर बात करूंगा।

1 टीम गठन करे : सबसे पहले 7 8 ईमानदार साथ देने वाले साथियों की टीम बनाए।
2 अपने क्षेत्र के बेसिक मुद्दों की लिस्ट बनाए।
3 प्रोफाइलिंग करे वोटरों और क्षेत्र की।
4 चुनाव की बजटिंग करे।
5 अगर बना सके तो घर पर छोटा सा ऑफिस बनाए।
6 दिखावा, फूहड़ता, रुपयों की बरबादी और जबरदस्ती का सौदा ना करें।

इस को बेहतर तरीके से समझने के लिए आपको देखना होगा 

Youtube channel 
https://youtube.com/@satishkhadka1?si=weWLt2uefyAjcQkW
https://youtu.be/j_7Pr-Q8E0I?si=bz3XcZmxUccUpe9v



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