फासीवाद
दिल्ली चुनाव में यह शब्द चर्चा में रहा, राजनीति का विषय है, और में राजनीति का विद्यार्थी हूँ, इसलिए इसे बेहत्तर तरिके से समझना जरूरी हो जाता है।
फासीवाद शब्द सर्वाधिकार वाद का व्यवहारिक रूप माना जाता है, यह हैं क्या इसे हम 5-6 बिन्दुओं में स्पष्ट तरह से समझने का प्रयास करेंगें।
1 लोकतंत्र एवं संसदीय शासन का विरोधी:- लोकतंत्र में, जनता द्वारा चुनकर आए सांसद मिलकर शासन को संविधान अनुरूप चलाते है, ऐसा नहीं होता कि संसद में, ना ही बहस हो, ना सांसद हो,
२-स्वतंत्रता एवं उदारवाद का विरोधी :- जनता को स्वतंत्रता संविधान से मिली है, और शासन करते शासक से उदारता की नीति अपनाने की आशा रखी जाती है, किंतु जब शासक के खिलाफ बोलना राष्ट्रद्रोह हो और हक की मांग करने पर लाठीचार्ज, तो ना स्वतंत्रता बची ना उदारवाद
3 = उग्रराष्टवाद :-आम जनता के मस्तिष्क में एक विशेष तरीके के राष्ट्र की भावना जगा देना।
५- नायकवाद :- इसे हम कह सकते है कि सर्वाधिकार किसी एक व्यक्ति में समाहित किसी एक नाम पर पुरे देश की शासन व्यवस्था को चलाना,
5- तर्क और विवेक में विश्वास नहीं -: हवाई बातों का किला बनाते हुए, मर्यादा भी भूल जाओ,
6- कुलीनंतंत्र में विश्वास - राष्ट्र सम्पत्ति एवं शासन का लाभकुछ विशेष लोगों के वर्चस्व में।
इस तरह कह सकते है कि एक व्यक्ति की शासन व्यवस्था का नाम है फासीवाद.

<< मुख्यपृष्ठ