माल नही स्त्री हूँ मे
21वि सदी के अंत की और बढ़ते हुई मानव संस्कृति नही दे पायी ,तो सिर्फ स्त्री को बराबरि का दर्जा। आज् भी पुरुष के लिए स्त्री सिर्फ उपभोग की एक वस्तु से ज्यादा कुछ नही।शिक्षा का स्तर् चांद और मंगल पर पहुंचने के बाद् भी,राह् चलती किसी लडकी को देख 'क्या माल हैं ' जैसे भद्दी कमेंट्र देने की सोच से बाहर नही निकल पाये हैं। निर्भय से लेकर अंकिता तक हर दिन आज भी लाखों स्त्री बलात्कार जैसी घिनोनी मानसिकता का शिकार हो रही हैं। कब तक कैडल मार्च या ट्वीटर पर # तक सीमित रहेगा हमारा विरोध? कब हम बात करेगे इस विषय पर? कब इसका सही ओर उचित विरोध होगा। मेरा यह प्रयास एक कोशिश हैं उस मनोविज्ञान पर बात करने की जो स्त्री भोगती हैं। कुछ प्रश्न जो यह किताब आप से करती हैं। हर माँ ओर बहन को गिफ्ट करनी चाहिए यह पुस्तक अपने घर के सदस्यों को। यह एक दृष्टिकोण है, समझने का प्रयास है। स्त्री को स्त्री के रूप में। ISBN: 978-93-5673-102-8 http://www.evincepub.com खरीदने के लिए - amzn.eu/d/aI48GvO https://www.amazon.in/dp/9356731020?ref dl.flipkart.com/s/Zv9im0uuuN Evincepub: https://evincepub.com/product/asuryapashya/ Bspkart: https://www.bspkart.com/product/asuryapashya/ Amazon: https://www.amazon.in/dp/9356731020?ref Flipkart: https://www.flipkart.com/asuryapashya/p/itma9891ca3125a8? Ebook Channels Instamojo: https://evincepub.stores.instamojo.com/product/3575869/asuryapashya/


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